आसमानी रिश्तों की परिभाषा........ काले बादलों जा शोर......सूरज ,चाँद , तारें , आकाशगंगाये , ग्रह-उपग्रह , लेकिन इन सबमें सबसे आगे कान्हा का ओमकार............ शिव की जटाओं पर सुशोभित होता ॐ............ और उन सबमें भी सबसे प्यारा आसमानी रिश्ता , आसमानी छत्र-छाया में पलता ज़मी का सुकून.......... किताबो की दुनिया में खोकर एक पहचान बनाई तुमने , पर होते गए अपनों के मेहमान जैसे......... दोस्तों का मतलबी झुंड बरसाता प्यार.......पर खुद के फायदे के लिए.........बस तुमने पूरी दुनिया समेत ली एक अलमारी में , जैसे बरसो से अलमारी में तह किया रखा हो , कोई पुराना कोट........ और उसकी सलवटों में तुम्हारी यादें , बातें , खुशियां , तन्हाई , विचार , अपनापन सब पड़ा -पड़ा कसमसा , रहा है......और तुम हँसने का जिस्मानी रिश्ता निभाने में व्यस्त............... क्योंकी तुम्हे पता है......दिखावे की दुनिया का सच.......... अपनों का दिखावटी प्यार......... तुम्हारी दौलत , प्रसिद्धई की चका-चोंध जिसे सब भोगते है .... तुम्हे बेवकूफ बना कर पर तुम उन्हें जानते हो बेवकूफ तुम नहीं वो खुद बन रहे है...... त...
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