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किस्से-कहानियों के जीते जागते पल (इंतज़ार)

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  एक किस्सा इंतज़ार का बेपनाह प्यार का। अब वो जमाना तो रहा नहीं कि चिट्ठियों का इंतज़ार करना ही पड़ेगा। अब जमाना है मोबाइल का। और ये मोबाइल वाला प्यार... भी असली वाला प्यार ही होता है। शायद ये उससे भी बढ़कर होता है। प्यार तो आखिर प्यार होता है जनाब! तो आज का किस्सा है। (इंतज़ार) आज उसका मन नहीं लग रहा था। दो दिन से उससे बात नहीं हुई थी तो वो बेहद उदास थी। आंखों में आंसू लिए बार - बार उसकी प्रोफ़ाइल पर जाकर उसको निहार रही थी। मन ही मन उसकी डीपी से तो कभी उसकी फोटो से बातें कर रही थी।  फिर मन ही मन कभी उसे उल्हाना दे रही तो कभी उससे दूर चली जाऊंगी छोड़ कर कह रही थी। फिर इनबॉक्स खोलकर देखती की उसका कोई मेसेज आया या नहीं। न,न.. ऐसा नहीं है कि वो उसे धोखा दे रहा था। ये बात वो भली भांति जानती थी कि वो किसी काम की वजह से मजबूर होगा। पर आज उसमें भावनाओं का सैलाब उमड़ा था। वो विचारों के दंगल में फंस सी गई थी। लंबे इंतजार के बाद वो आंखों में आंसू लिए तकिए पर सर रख कर मोबाइल पर एक सेड सांग सुनती हुई सो गई। अगली सुबह मोबाइल पर जैसे ही मैसेज फ्लैश हुआ वो लड़ने पहुँच गई उससे और लड़ते - लड़ते खो गई उसक...

असफलता

  असफलता इंसान को तोड़ती ही नहीं, अंदर से खोखला भी कर देती है। फिर उसमें भरता है क्रोध, वो क्रोध जो उसका सर्वस्व निगलने की ताकत रखता है। और वो क्रोध उस इंसान को एक दिन निगल ही जाता है।

प्यार के रूप अनेक

  प्रेम~💝 कसमें वादे प्यार वफ़ा सपने ताने उलाहने प्रतीक्षा शर्म हया संकोच डर प्यार का हर रूप हर चेहरा, बेमिसाल है। प्यार फूलों सा नाज़ुक हवा सा नटखट धरती जैसा धानी भी है। प्यार कलियों पर बैठा भवरों का गुंजन भी है। प्यार मौसमों की अंगड़ाई सरोवर में खिला नीलकमल सा भी है।

पीरियड (रजस्वला)

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  छत के किनारे बैठी - बैठी मानवी सड़क पर बहती बरसाती नदी को देख रही थी, जो तेज बरसात में 2 घँटे के अंदर ही अंदर छलछलाती नदी में तब्दील हो जाती थी। और बरसात रुकने के 4 घँटे बाद ये नदी गायब हो जाती थी। आज मानवी को रसोईघर में नही जाना था, पूजा नहीं करनी थी क्योंकि आज सुबह उसके पीरियड शुरू हो गए थे। सासू माँ ने सुबह से घर में हाय - तौबा मचा रखी थी। क्योंकि वो महीने के सिर्फ इन 3 दिनों रसोई सम्हालती थी। मानवी इन 3 दिनों एक अजीब सा टॉर्चर सहती थी। आधी बार प्यासी रहती क्योंकि उसे बार - बार सासूमाँ से पानी मांगना अच्छा नहीं लगता था। आधी बार कुछ खाने की इच्छा होने पर भी भूखी रह जाती सोचती अगर मांगूंगी तो सासूमाँ मेरे बारे में क्या सोचेंगी। पूजा कर नहीं पाती तो मन विचलित रहता। कभी - कभी तो कोई बड़ा त्योहार ही इन तीन दिनों के बीच आ जाता और वो इन बड़े त्योहारों पर भी अलग - थलग पड़ी रहती। कोई उससे कुछ खास न पूछता न उसे उस पूजा या किसी और चीज में शामिल करता था। घर के सारे मर्दों, पास - पड़ौस, यहाँ तक कि रिश्तेदारों तक को उसके पीरियड में होने के बारे में पता चल जाता था। क्योंकि सासूमाँ जब भी किसी से म...

इल्ज़ाम

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  सरकारी अस्पताल में पर्ची कटा कर धन्नो बाहर मरीजों के लिए लगी लोहे की कुर्सी पर बैठ डॉक्टर साहब का इंतजार करने लगी। मन ही मन में बड़बड़ाती जा रही थी इतना बड़ा डॉक्टर पता नहीं कब नम्बर आएगा, आएगा भी या नहीं। बाहर मरीजों की लम्बी लाइन लगी थी। लोग न जाने कब से आ बैठे थे डॉक्टर साहब के इंतजार में।  वहाँ इतनी भीड़ थी कि लोग एक-दूसरे से चिपके जा रहे थे। एक तो इतनी गर्मी ऊपर से भीड़। कोरोना संक्रमण फैलने का बहुत डर था। किसी ने मास्क लगाया था, किसी ने नहीं। धन्नो पसीने से पूरी भीग गई थी उसका जी घबरा रहा था,  ' हे भगवान मेरे बच्चे को कोरोना मत देना। हम लोग बहुत गरीब है'। कन्नू को गोद में लिए वो सोच रही थी। वो मन ही मन सोच रही थी डॉक्टर दवाइयां महंगी न लिख दे उसके पास तो सिर्फ 500 रुपये है जो उसने अपने ब्लाउज में रखे हुए थे। दोपहर हो रही थी उसे और बच्चे को भूख भी लगी थी। वो अपनी भूख तो बर्दास्त कर लेगी पर बच्चे की भूख को कैसे बर्दास्त करे।  चुप...रे कन्नू अभी बिस्किट दिलाती हूँ मेरे राजा बेटे को इतने में कम्पाउंडर ने आवाज लगाई कन्नू...... धन्नो जल्दी से उठी और भाग कर आई ये है कन्न...

उपहास

  उपहास अपने पति से ज्यादा पढ़ी-लिखी स्मिता की शादी एक कम पढ़े-लिखे व्यक्ति से हो जाती है। स्मिता को इससे कोई एतराज नहीं होता। वो हमेशा अपने पति का साथ देती और उनकी बातें मानती। पर स्मिता का पति हमेशा उसकी बात काटता और उसका मजाक उड़ाता था। उसके मायके वालों को भी भला-बुरा कहता और उनका भी मजाक उड़ाता था। स्मिता सब सुन लेती थी, ज्यादा कुछ नहीं कहती थी अपने पति से कि आपने उनका या मेरा मजाक क्यों उड़ाया। उसे लगता धीरे-धीरे वो सुधर जाएगा और उसका मजाक उड़ाना बंद कर देगा। लेकिन उसके पति की ये आदत धीरे-धीरे कम होने की जगह बढ़ती ही गई। अब तो वो बिना बात भी उसका मजाक उड़ाने या तानें देने से बाज नहीं आता था। वो उसका मजाक उड़ा खुद को बहुत महान समझता था। रोज की तरह आज सुबह स्मिता चाय और अख़बार लेकर अपने पति के पास आकर बेड पर ही बैठ जाती है। और चाय पीती हुई अख़बार पढ़ने लग जाती है। एक डॉक्टर की मौत की खबर पढ़ कर वो बोलती है। देखो इसकी भी मौत हो गई कोरोना से। स्मिता की बात सुन कर उसका पति बोलता है क्यों तू इसे जानती थी क्या? स्मिता बोली क्या मतलब? उसके पति ने कहा क्या पता तू उसे जानती हो, तेरे अंदर...

जेवर

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  सुप्रिया की शादी होते ही वो गहनों से लाद दी गई। कानों में बड़े-बड़े झुमके, भारी मंगलसूत्र, दोनों हाथों में मोटे-मोटे कड़े, पैरों में भारी-भारी पायजेब, और हमेशा एक जरी-गोटे वाली साड़ी। सुप्रिया ये सब पहन फूली नहीं समाती थी। उसे भी ये सब पहनना बहुत अच्छा लग रहा था। लेकिन शादी के एक महीने बाद ही वो इस सब गहनों के भारीपन से दबने लगी थी। वो अपनी सास से जेवर उतार हल्के जेवर पहनने की बात कहना चाहती थी पर सास की खुशी देख कह नहीं पा रही थी। उसकी सास जो भी आता उसके सामने खनदानी गहनों की तारीफ लेकर बैठ जाती थी। सुप्रिया का एक देवर कंवारा था। एक दिन उसने अपनी सास को एक रिश्तेदार को कहते सुना अब दूसरे बेटे की भी जल्दी शादी करनी है,  'तो रिश्तेदार ने कहा दूसरी बहु को भी इतना ही जेवर चढ़ाना पड़ेगा आपको वो भी ले रखा है क्या'?  तो उसकी सास बोली  अरे! नहीं यही जेवर पहन कर मैं ब्याह कर आई थी इस घर में। यही जेवर पहन कर बड़ी बहू आई है, और यही जेवर पहना कर छोटी बहू को ले आएंगे। फिर इन जेवरों को अगली पीढ़ी के लिए बैंक में रख देंगे। सुप्रिया सब सुनती रह गई जिन जेवरों से वो दबी जा रही थी वो उसके थ...

रांड (एक गाली)

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  रांड  (एक गाली) राजस्थान के गांवों क्या शहरों तक में औरतों को दी जाने वाली एक आम, भद्दी, अपमानजनक  गाली।  ये गाली सास अपनी बहू को,  माँ तक अपनी बेटी को देती हुई दिख जाएगी। पुरुषों का तो आप समझ सकते होंगे वो किस- किस को रांड नहीं कहते होंगे। क्या अनपढ़ क्या पढ़े-लिखे सभी कभी न कभी इस गाली का कहीं भी शान से इस्तेमाल कर लेते है। हमारा सभ्य समाज और भाषा भद्दी गालियों का। एक कहानी रांड... शनिश्चरी के पैदा होते ही उस पर शनिश्चर लग गया था। एक तो देखने में थोड़ी पक्के रंग की और उस पर उसके बाल भी भूरे रंग के थे। हालाकि उसके नाक-नक्स बहुत सुंदर थे। कुल मिलाकर वो दिखने में इतनी बुरी भी नहीं लगती थी। लेकिन पूरा घर उसे उसके दिखने को लेकर ताने मारने से बाज नहीं आता था। और गाहे-बगाहे उसे "रांड" कहकर संबोधित कर दिया जाता था। शनिश्चरी को उसे "रांड" कहना अच्छा नहीं लगता था।  गांव में लड़कियों को आठवीं के बाद पढ़ाने का रिवाज नहीं था सो उसकी भी पढ़ाई छुड़वा दी गई।  गांव का ही एक लड़का रमेश उसे मन ही मन प्रेम करने लगा था।  शनिश्चरी के घर में एक गाय थी। और वो लड़का रोज सुबह व...

रिश्वत

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  कलेक्टर हो या एक्टर सब रिश्वत के नुमाइंदे है घूस की पीढ़ी के ये रक्षक,सबके सामने ईमादारी के पुतले पीछे बेईमानी में कलाकार है। कलेक्टर ने पेट्रोल पंप के मालिक की एक और पेट्रोल पंप के लिए लीज कैंसिल कर दी थी। तो उसने एनओसी जारी करने का आवेदन किया तो कलेक्टर के पीए ने 2 लाख की डिमांड कर दी। पेट्रोल पंप के मालिक ने एसीबी में शिकायत कर दी। फोन ट्रैप हुआ खुफिया जांच हुई। और कलेक्टर का पीए पैसे लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया, तो उसने एक 1 लाख रुपये वापस करते हुए ईमानदार बनने का नाटक करते हुए कहा, "हम ईमानदारी से काम करते है नाजायज पैसा नहीं लेते"।  जाँच में सामने आया कलेक्टर भी पीए से मिला हुआ था। दोनों रिश्वत का पैसा आधा-आधा करते थे। अब कलेक्टर तो किसी तरह बच गया क्योंकि वो सामने से पैसा नहीं ले रहा था। पीए फंस गया गिरफ्तार हुआ वो अलग। लेकिन पेट्रोल पंप के मालिक का नया पेट्रोल पंप अधर में लटक गया। अब नया पीए भी अपने हिसाब से रिश्वत मांग रहा है। अब मजबूरी में वो रिश्वत दे भी रहा है। आखिर उसने ये पैसा भी तो कम पेट्रोल और मिलावटी पेट्रोल भर-भर कर कमाया है। बेईमानी रुके तो कैसे रुके सब ...

कागज़ का टुकड़ा

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  उस एक कागज के टुकड़े ने सबकी नींद उड़ा दी थी। वो कोई आम कागज का टुकड़ा नहीं था। एक छोटा सा वसीयत नामा था। जो उसके पिता लिख कर किसी वकील के यहाँ रख गए थे। अभी तेरहवाँ भी नहीं हुआ था। ये तेरहवें से एक दिन पहले ही सबको वकील से मिला था। पूरे मेहमानों के बीच इस कागज़ के टुकड़े की कानाफूसी सी हो रही थी।  कल तेरहवाँ था पर आज सब स्तब्ध थे। आखिर ऐसा क्यों हुआ? सब यही सोच रहे थे।  इतने अच्छे बेटे-बहु, एक अच्छे घर में ब्याही लड़की जो अपने पिता का बहुत ध्यान रखते थे। उनकी हर जरूरत का ख्याल रखते थे। फिर ऐसा निर्णय क्यों हुआ सब इन्ही विचारों में उलझे थे। फिर वो दिन भी बीत गया आज उनके पिता का तेरहवाँ था और सब काम ठीक से हो रहा था। इसी बीच वो वकील आ गया और कहा आप सबका निर्णय क्या है, जल्दी बता दीजिए मुझे ये कोट में केस दाखिल करना है। सब एक साथ बोल पड़े केस, कैसा केस? वसीयत का केस जो इनके गोद लिए बेटे को मिलने जा रही है इन दोनों को नहीं। पर ऐसा क्यों, ये बेटा इन्होंने कब लिया जो कोई नहीं जानता। इतने में उनका बेटा और बेटी बोल पड़े हां आप ये सारी प्रोपर्टी उस नेक इंसान को दे दे। अब सब अचंभित थे। ...

सरकारी आपदा

 आपदा का इम्तिहान कितने बेरोजगार हुए, कितने भूख से मरे, कितने बेइलाज मरे, कितने ख़ौफ़ से मरे, कितने अवसाद में मरे। कोई आंकड़ा नही हमारे पास सिवाय सरकारी आंकड़े के। एक छोटी लघुकथा : सरकारी आपदा आत्माराम जी कोल्हू के बैल जैसे हो गए है, सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाते-लगाते। अवसाद और क्रोध अब उनकी नसों में बहता है। उनकी पत्नी जो ठीक से दस्तख़त भी नहीं कर सकती उसने सुबह आत्माराम जी को झिड़क दिया। ' वर्षो से देख रही हूँ, भूसे की तरह पिसते रहते हो, पर सरकारी गेंहू तक घर नहीं ला रहे। फुट गई मेरी किस्मत जो तुम संग ब्याही गई।' आत्मा राम जी भी चिल्ला पड़े ' जाओ तो अपने मायके, वहाँ तिजोरी खुली पड़ी है।'  दो साइन भी ठीक से नहीं कर सकती, और मुझे सीखा रही है। इसके नाज- नखरे उठाते- उठाते सारी जिंदगी खपा दी मैंने पर ये नहीं सुधरी। लॉकडाउन ने आत्माराम जी प्राइवेट स्कूल की नोकरी छीन ली, बच्चे अब ट्यूशन पढ़ने भी नहीं आते जिससे उनका घर का खर्चा चल रहा था। पहले वो सरकारी राशन को अपनी शान के खिलाफ समझते थे। अब उसी राशन के लिए तरस रहे है। क्योंकि उनके पास आधारकार्ड नहीं है। लॉकडाउन से पहले वो आधारकार्ड ...

कौन किससे ज्यादा प्यार करता है??

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  एक राजा और एक रानी थी। दोनो में एक बार शर्त लगती है कि दोनों में से ज्यादा प्यार कौन करता है राजा रानी से, या रानी राजा से। लेकिन दोनों ये तय नहीं कर पाते की कौन ज्यादा प्यार करता है। राजा ने सुन रखा था कि उनके पड़ोस में एक नवयुगल रहता है और दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते है। और उनके घर की बत्ती पूरी रात जलती रहती है कभी बुझती नहीं है। रात में राजा महल की छत पर रानी को ले गए और कहा देखो ये आदमी अपनी पत्नी से बहुत प्यार करता है इसका मतलब आदमी हमेशा अपनी पत्नियों से ज्यादा प्यार करते है। तो रानी ने कहा नहीं आप गलत कह रहे है। पत्नियां हमेशा अपने पति से ज्यादा प्यार करती है। दोनों में बहस होने लगती है।  दोनों मंत्री के पास जाते है मंत्री कहता है एक उपाय है पता करने का कि दोनों में से कौन ज्यादा प्यार करता है। मैं कल रात उस आदमी के पास जाता हूँ और कहता हूँ कि रानी आपसे बहुत प्यार करने लगी है वो आपसे शादी करना चाहती है लेकिन एक शर्त है कल रात आप अपनी पत्नी का कत्ल कर दे और घर की सारी बत्तियां बुझा दे। इससे साबित हो जाएगा कि आप रानी से शादी के लिए तैयार है। इस पर रानी कहती है क्य...

सुसाइड

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  मकान मालिक उकता सा गया था। अपने किरायेदार से क्योंकि उसे अब तक अपने किरायेदार से किराया नहीं मिला था। मिलता भी कैसे वो अपनी नोकरी गंवा बैठा था लॉक डाउन में। किराए के लिए उसने साफ मना कर दिया था। कह दिया था उसने नोकरी लगते ही सबसे पहले आपका किराया दूंगा मैं आप मुझे 4 साल से जानते है। बस अभी थोड़ी मुसीबत में हूँ, आप मेरा यकीन कीजिये। मकान मालिक भी अच्छे थे सो मान गए। पर अब वो उससे उकता गए थे। इसलिए मकान खाली करवाना चाहते थे पर उन्हें कोई उपाय नहीं सूझ रहा था कि कैसे मकान खाली करवाये। दो दिन बाद किरायेदार ने सुसाइड कर लिया अपने कमरे में, ये उनको उसके दोस्त के आने पर पता चला। जब उसने दरवाजा नहीं खोला तो उन्होंने किसी तरह खिड़की खोल उसे आवाज लगाने की कोशिश की तो वो पंखे से झूलता दिखा उन दोनों को। पुलिस आई खूब छान-बीन हुई  पता चला वो कर्जे में डूबा हुआ था। उसने बहुत लोगो के पैसे खा रखे थे। लोग उसे फोन पर गालियां, धमकियां देते थे इसी से तंग आकर उसने सुसाइड कर लिया था। वो सोचते रह गए काश! समय रहते मकान खाली करवा लिया होता तो आज ये दिन नहीं देखना पड़ता। उनका मकान भी अब बदनाम हो चुका था ...

चैटिंग की दुनिया

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  असली दुनिया में नकली चेहरों की जमात सजी है। भोंडेपन में हर निगाह ठहरी है।" एक कहानी रिया और रवि की...! दोनों की दोस्ती एक दिन फेसबुक पर होती है। रवि रिया की डीपी पर मुग्ध हो जाता है। और उससे प्यार करने लगता है। दोनो की खूब चैट होती है हर दिन। फिर अचानक एक दिन रिया गायब हो जाती है। रवि से बात करना बंद कर देती है। रवि पागल हो जाता है सारा सारा दिन उसके ऑनलाइन आने का इंतजार करता है पर रिया नहीं आती। इसी दौरान रवि की एक और लड़की से बात-चीत शुरू हो जाती है वो रवि की बताती है कि रिया की मौत हो चुकी है और वो उसकी बहन है। रवि बहुत दुखी होता है। अब रवि की जिंदगी उस दूसरी लड़की के इर्द-गिर्द घूमने लगती है एक दिन दूसरी लड़की भी गायब हो जाती है। रवि फिर बहुत दुखी होता है। उसे अपनी दुनिया लूटी हुई नजर आने लगती है। इसी दौरान रवि की एक तीसरी लड़की से बातचीत शुरू हो जाती है वो थोड़ी ही चैट के बाद रवि से पैसे मांगने लगती है। रवि उसकी बातों में आ जाता है और 1000 रु उसके अकाउंट में डाल देता है। अब हर 10, 15 दिन बाद वो रवि से पैसे मांगने लगती है। रवि दुखी हो जाता है और उसे पैसों के लिए मना कर देता है। इ...

तुम्हे कसम है हमारी...!!

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  चोट लगती है दिल पर कभी तो क्या हुआ, तुम उदास मत होना। गज़ल, चुटकुलों से दिल बहलाना। अपना दर्द किसी अपने से बांट लेना। अपने शौक जिंदा रखना। आंखों में नमी को जगह मत देना। बरसात में भीग जाना। आकाश से गले मिल लेना। खुशियों की राह में जो बने रोड़ा, उसे खाई में धकेल देना। कोई कुछ भी कहे सीने पर पत्थर न रखना। जीवन की धूप तो यूं ही सुलगती है, उसे काली बदली से मिलवा देना अपना अंतर्मन दुखी मत करना, मौसम का जोड़-घटाव समझ  उसे जमीं में दफ़ना देना तुम। सुनो.... तुम तो बगीचे की शान हो... गुड़हल की मुस्कान हो... पलाश की जान हो... गुलाब से महकते... चंपा-चमेली की... सादगी से पूर्ण हो। सुनो.... दिल मे बरसात हुई हो तो... आंखों से बाहर बाहा देना। एक पन्ना लिख कर... किसी पेड़ के नीचे रख आना। ज़ख्मों की सतहों मेंखुद को मत दबाना तुम। फिर कोई यादों की गठरी... खुली है शायद। अधूरे वाक्य कंठें... जमे है शायद। चिर-परिचित घाव... हरे हुए है शायद। तुम काली रात में... खुद को न रुलाना  कसम है तुम्हें हमारी...!!

दास्ता अकेलेपन की (कोरोना वायरस)

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 भरे -पूरे घर की मालकिन सुलभा। यूँ तो बहुत सुघड़ गृहणी थी। लेकिन जैसे-जैसे बच्चे बड़े हो रहे थे आत्मनिर्भर हो रहे थे, और सुलभा अकेलेपन का शिकार। पति अपने काम मे व्यस्त बच्चे अपने कॉलेज में व्यस्त। ऐसे में सुलभा का वक्त काटे नहीं कट रहा था। बस सुबह-शाम काम, खाना फिर सारे दिन अकेले रहती थी वो। टीवी, अख़बार पढ़-पढ़ कर बोर हो चुकी थी। ऐसे में एक दिन खबर आई उनकी जिठानी बीमार हो गई है, उसे कोरोना हुआ है। कोरोना उस वक्त नया था वो समझ नहीं पाई कि ये कौन सी बीमारी है। खैर उसके पति जैसे-तैसे उसे वहाँ अपनी भाई- भाभी से मिलाने ले गए। लेकिन ये क्या उन्हें उनसे मिलने ही नही दिया गया और उल्टा उन दोनों को वहाँ रहने भी नही दिया गया। फिर जैसे-तैसे वो दोनो अपने घर वापस आये। लेकिन यहाँ आते ही सुलभा की तबियत खराब हो गई डॉक्टर ने उसे कोरोना बताया। सुलभा को घर मे ही अलग छत पर बने कमरे में रख दिया गया। उसका खाना वहीं गेट के नीचे से दिया जाने लगा इससे सुलभा बहुत आहत हो गई। एक तो बीमार शरीर में जान नही ऊपर से अकेलापन वो बर्दास्त नहीं कर पा रही थी। खैर वो जल्द ही ठीक हो गई और घर में जो जैसे चल रहा था चलने लगा। ऐस...

अवनि ने अम्बर को पुकारा

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  अवनि ने अम्बर को पुकारा देख चहुँ और का नजारा बंजारा सूरज धरती तपाने लगा है। सागर सुखाने लगा है। ओ मेघ राजा अब तो आजा अपनी फुहार से इस सूरज का ताप थोड़ा कम कर जा। पहाड़ी कंधे से उतर आम की डाल पर बैठा सूरज अपनी तपिश से सबको डराता सूरज मिट्टी के घड़े में सबको डुबोता सूरज अपनी कामयाबी पर इतराता सूरज दिन में सबको जलाता रात में छिप जाता सूरज। अवनि देख ये दिनकर की चालाकी उषा संग आया निशा में घुल गया  संध्या संग पहाड़ी की ओट में छिप गया है। अब कल भरी दोपहरिया इसे आने दे सर पर सबके नाचने दे उसी वक्त मेघ राजा को बुलाऊँगी इसे फुहार में भिगोऊँगी दिन में तारें दिखा इसकी ज्वाला शांत करूँगी।

प्रेम का झरना

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  मेरे अंदर न सूखने वाला एक झरना है। पहाड़ से उतरती एक नदी है। एक तालाब भी है जो कभी खाली नहीं होता है। हमेशा बहता रहता है हमेशा भरा रहता है। जैसे काले बादलों में पानी भरा रहता है। बंजर जमीं को सींचने के लिए मैं भरी रहती हूँ। प्रेम से प्रेम को सींचने के लिए। आकर्षण तुम्हारे आकर्षण में मैं बिन डोर  खींची चली जाती हूँ। तुम मुझे बरबस अपनी ओर खींच लेते हो बस एक आवाज लगा तुम मुझे खुद में समेट लेते हो। तुम्हारी सादगी से मैं बेहद प्रभावित हो गई हूँ, मैं आजकल तुम बन गई हूँ। बिना बात अब खुद से बाते करती हूँ घँटों तुम्हारा इंतजार करती हूँ वो भी तुम्हें बिना बताए। जानते हो मैं ये सब नहीं चाहती फिर भी सब कर रही हूँ सिर्फ तुम्हारे लिए। अपने प्रेम के लिए। जानती हूं नियति तो कुछ और ही है, पर अब सब स्वीकार चुकी मैं। हृदय में स्थान दे चुकी मैं तुम्हे। अब यूं ही मेरे हृदय में रहना मेरे हृदय का लाल रक्त बन कर, मेरे जीवित रहने तक।

सुनों ऐ स्त्री!!

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 महिला दिवस क्या होता है?? सिर्फ एक ही दिन ये सम्मान क्यों होता है?? बच्ची के जन्मते ही कुछ की आँखे नम क्यों होती है?? ब्याह होते ही वो पराई क्यों हो जाती है?? माँ बनते ही प्रौढा क्यों हो जाती है?? वृद्धा होते-होते घर का कबाड़ क्यों हो जाती है?? अब भी वो पुरूषों के बराबर क्यों नहीं?? सब चुप क्यों हो!! कुछ तो बोलो!! सुनों ऐ स्त्री~~ मायने नहीं रखता तुम गोरी हो या सांवली हो, मायने रखता है तुम्हारा जज्बा। मायने नहीं रखता तुम्हारा परिवार कितना रूढ़िवादी है, मायने रखता है तुम्हारा हौसला। मायने नहीं रखता तुम्हारी राह में कितनी बाधाएं है, मायने रखता है तुम इन बाधाओं के पार कैसे जाती हो। समझी न तुम!! ऐ स्त्री!!

गेंदा फूल

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  सुनों ऐ गेंदा फूल  गुलशनका कारोबार अब चल निकलेगा बसंती बयार अब हर तरफ गुल महकएगी पलाश दहकेगा, अमराई चटकेगी फागुन रंग उड़ेगी हर मुख पर लाली छाएगी हर बदन में प्रेमल सितार बजेगी इस फागुन ये बसंती बयार खूब झूमेगी। सुनों ऐ गेंदा फूल.... इंतजार रंगों का जाना पहचाना सा है। स्वयं की देह पर प्रेम प्रेमी का देख रंगों में सजने की होड़ है। गौरवर्ण पर सब इंकित हो रहा है। लाल रंग सहज ही सब पर हावी हो रहा है। प्रेमी का प्रेम आकाश सा विस्तृत इंद्रधनुष सा खिल रहा है। ये देख रंगों का तापमान बढ़ गया है। ऐ गेंदा फूल।